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श्लोक 1.16.22  |
নিরবধি হরিদাস গঙ্গা-তীরে-তীরে
ভ্রমেণ কৌতুকে ’কৃষ্ণ’ বলি’ উচ্চস্বরে |
निरवधि हरिदास गङ्गा-तीरे-तीरे
भ्रमेण कौतुके ’कृष्ण’ बलि’ उच्चस्वरे |
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| अनुवाद |
| हरिदास लगातार गंगा के तट पर घूमते रहते थे और जोर-जोर से कृष्ण का नाम जपते रहते थे। |
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| Haridas constantly roamed the banks of the Ganges and loudly chanted the name of Krishna. |
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