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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 193
श्लोक
1.16.193
মহামণি জ্বলিতেছে মস্তক-উপরে
দেখি’ ভযে বিপ্র-গণ ’কৃষ্ণ কৃষ্ণ’ স্মরে
महामणि ज्वलितेछे मस्तक-उपरे
देखि’ भये विप्र-गण ’कृष्ण कृष्ण’ स्मरे
अनुवाद
जब ब्राह्मणों ने उसके सिर पर चमकीली मणि देखी, तो उन्हें भय से कृष्ण का स्मरण हो आया।
When the Brahmins saw the shining gem on his head, they were afraid and remembered Krishna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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