श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  1.16.171 
তাহানে ও দুঃখ দিল যে-সব যবনে
সবṁশে উচ্ছন্ন তা’রা হৈল কত-দিনে
ताहाने ओ दुःख दिल ये-सब यवने
सवꣳशे उच्छन्न ता’रा हैल कत-दिने
 
 
अनुवाद
जिन यवनों ने हरिदास को पीटा था, वे तथा उनके परिवार कुछ ही दिनों में नष्ट हो गये।
 
The Yavanas who had beaten Haridasa and their families were destroyed within a few days.
तात्पर्य
पापी नास्तिक यवन भी वैष्णवों को पीड़ा देने व उनसे ईर्ष्या करने वालों को प्राप्त दयनीय परिणाम शीघ्र ही प्राप्त हुए। स्कंद पुराण में कहा गया हैः

हंति निंदति वै द्वेष्ति वैष्णवान् न अभिनंदति

क्रुध्यते याति नौ हर्षं दर्शने पतनानि षट्

‘‘जो कोई वैष्णवों की हत्या करता है, उनकी निंदा करता है, वैष्णवों से ईर्ष्या करता है या उनसे क्रोधित होता है और जो कोई वैष्णवों को नमन नहीं करता या उन्हें देखकर खुशी का अनुभव नहीं करता, निश्चित रूप से नारकीय स्थिति में गिर जाएगा।’’ इस अचूक शास्त्रीय आज्ञा के अनुसार, यवन शीघ्र ही अपने परिवारों समेत हैजे या चेचक जैसी भयानक बीमारियों से नष्ट हो गए।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)