श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 159-161
 
 
श्लोक  1.16.159-161 
উচ্চ করি’ হরি-নাম লৈতে লৈতে
আইলেন হরিদাস ব্রাহ্মণ-সভাতে
হরিদাসে দেখি’ ফুলিযার বিপ্র-গণ
সবেই হৈলা অতি পরানন্দ-মন
হরি-ধ্বনি বিপ্র-গণ লাগিলা করিতে
হরিদাস লাগিলেন আনন্দে নাচিতে
उच्च करि’ हरि-नाम लैते लैते
आइलेन हरिदास ब्राह्मण-सभाते
हरिदासे देखि’ फुलियार विप्र-गण
सबेइ हैला अति परानन्द-मन
हरि-ध्वनि विप्र-गण लागिला करिते
हरिदास लागिलेन आनन्दे नाचिते
 
 
अनुवाद
वे ज़ोर-ज़ोर से हरि का नाम जपते हुए ब्राह्मणों की सभा में पहुँचे। हरिदास को देखकर ब्राह्मण प्रसन्नता से भर गए। फिर ब्राह्मण हरि का नाम जपने लगे और हरिदास आनंद में नाचने लगे।
 
He arrived at the gathering of Brahmins, loudly chanting Hari's name. Seeing Haridas, the Brahmins were filled with joy. The Brahmins then began chanting Hari's name, and Haridas began dancing in joy.
तात्पर्य
राजा और काजी के अत्याचार और दमन से मुक्त होकर तथा फुलिया के ब्राह्मण समुदाय को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से हरि के नाम का जाप करते हुए ऒाकुर हरीदास वहाँ पहुँचे। संकीर्ण संप्रदायवाद व भक्ति सेवा के प्रति विद्वेष की भावना से कुछ तथाकथित ब्राह्मणों ने पूर्व में हरीदास को पवित्र नाम देने वाले गुरु के रूप में स्वीकार करना उचित नहीं माना था। लेकिन अब उनकी असाधारण असीम शक्ति के बारे में सुनकर सभी प्रतिष्ठित ब्राह्मणों ने उन्हें पवित्र नाम देने वाले गुरु के रूप में स्वीकार कर लिया, जो स्वयं भगवान से भिन्न नहीं हैं। उन सभी ने हरीदास का आदर-सत्कार करना आरंभ कर दिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)