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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 155
श्लोक
1.16.155
আপন-ইচ্ছায তুমি থাক যথা-তথা
যে তোমার ইচ্ছা, তাই করহ সর্বথা”
आपन-इच्छाय तुमि थाक यथा-तथा
ये तोमार इच्छा, ताइ करह सर्वथा”
अनुवाद
“अब आप जहां चाहें रह सकते हैं और जो चाहें कर सकते हैं।”
“Now you can live wherever you want and do whatever you want.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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