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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 132
श्लोक
1.16.132
মহা-বলবন্ত সব চতুর্-দিকে ঠেলে
মহা-স্তম্ভ-প্রায প্রভু আছেন নিশ্চলে
महा-बलवन्त सब चतुर्-दिके ठेले
महा-स्तम्भ-प्राय प्रभु आछेन निश्चले
अनुवाद
जब सबसे शक्तिशाली मुसलमानों ने हरिदास को धक्का देने की कोशिश की, तो उन्होंने पाया कि वह एक पत्थर के खंभे की तरह अचल थे।
When the most powerful Muslims tried to push Haridasa, they found that he was as immovable as a stone pillar.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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