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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 131
श्लोक
1.16.131
বিশ্বম্ভর-অধিষ্ঠান হৈল শরীরে
কা’র শক্তি আছে হরিদাসে নাডিবারে?
विश्वम्भर-अधिष्ठान हैल शरीरे
का’र शक्ति आछे हरिदासे नाडिबारे?
अनुवाद
जब हरिदास का शरीर भगवान विश्वम्भर का निवास बन गया था, तब उनके शरीर को हिलाने की शक्ति किसमें थी?
When Haridasa's body became the abode of Lord Vishvambhar, who had the power to move his body?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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