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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 127
श्लोक
1.16.127
মাটি দিলে পরলোকে হৈবেক ভাল
গাঙ্গে ফেল,—যেন দুঃখ পায চিরকাল
माटि दिले परलोके हैबेक भाल
गाङ्गे फेल,—येन दुःख पाय चिरकाल
अनुवाद
"अगर हम इसे दफ़ना देंगे, तो अगले जन्म में इसे ज़रूर बेहतर जगह मिलेगी। बेहतर होगा कि इसे गंगा में फेंक दिया जाए, ताकि यह हमेशा के लिए तड़पता रहे।"
"If we bury it, it will surely find a better place in its next life. It would be better to throw it into the Ganges, so that it can suffer forever."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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