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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 123
श्लोक
1.16.123
সর্ব-শক্তি-সমন্বিত প্রভু-হরিদাস
হৈলেন অচেষ্ট, কোথা ও নাহি শ্বাস
सर्व-शक्ति-समन्वित प्रभु-हरिदास
हैलेन अचेष्ट, कोथा ओ नाहि श्वास
अनुवाद
हरिदास, जो सभी रहस्यमय शक्तियों से संपन्न थे, तब निश्चल हो गए और उनकी सांस रुक गई।
Haridasa, who was endowed with all mystical powers, then became motionless and his breathing stopped.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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