श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  1.16.116 
বিস্মিত হৈযা ভাবে সকল যবনে
“মনুষ্যের প্রাণ কি রহযে এ মারণে?
विस्मित हैया भावे सकल यवने
“मनुष्येर प्राण कि रहये ए मारणे?
 
 
अनुवाद
मुसलमान यह देखकर आश्चर्यचकित हुए और सोचने लगे, “क्या इतनी मार खाने के बाद भी कोई मनुष्य जीवित रह सकता है?
 
The Muslims were astonished to see this and started thinking, “Can any human being survive even after receiving so much beating?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)