| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा » श्लोक 111 |
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| | | | श्लोक 1.16.111  | হরিদাস-স্মরণে ও এ দুঃখ সর্বথা
ছিণ্ডে সেই-ক্ষণে, হরিদাসের কি কথা | हरिदास-स्मरणे ओ ए दुःख सर्वथा
छिण्डे सेइ-क्षणे, हरिदासेर कि कथा | | | | | | अनुवाद | | हरिदास की तो बात ही क्या, जो व्यक्ति उनके कार्यों का स्मरण करता है, वह भी तुरन्त ही समस्त भौतिक दुःखों से मुक्त हो जाता है। | | | | What to say of Haridasa, even the person who remembers his deeds is instantly freed from all material sufferings. | |
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