श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  1.15.93 
বিপ্র-প্রিয প্রভুর চিত্তের এই কথা
’তিন-বার দিলে পূর্ণ হৈবে সর্বথা
विप्र-प्रिय प्रभुर चित्तेर एइ कथा
’तिन-बार दिले पूर्ण हैबे सर्वथा
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों के प्रति स्नेह रखते हुए भगवान ने सोचा, “यदि उन्हें तीन बार दिया जाए, तो वे पूरी तरह संतुष्ट हो जाएंगे।”
 
Having affection for the Brahmins, the Lord thought, “If they are given three times, they will be completely satisfied.”
तात्पर्य
वाक्यांश सित्‍तरा कथ , का अर्थ है " मन का उपयोग " ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)