श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  1.15.89 
সবেই আনন্দে মত্ত, কে কাহারে চিনে?
প্রভু ও হাসিযা আজ্ঞা করিলা আপনে
सबेइ आनन्दे मत्त, के काहारे चिने?
प्रभु ओ हासिया आज्ञा करिला आपने
 
 
अनुवाद
सभी लोग आनंद में डूबे हुए थे और एक-दूसरे को पहचान नहीं पा रहे थे। भगवान भी मुस्कुराए और उपदेश दिया।
 
Everyone was so immersed in joy that they couldn't recognize each other. The Lord smiled and preached.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)