श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.15.88 
আর-বার আসি’ মহা-লোকের গহলে
চন্দন, গুবাক, মালা নিযা নিযা চলে
आर-बार आसि’ महा-लोकेर गहले
चन्दन, गुवाक, माला निया निया चले
 
 
अनुवाद
इस प्रकार, आगामी शोरगुल में, उन्हें दूसरी बार चंदन का लेप, पान और फूलों की मालाएं प्राप्त हुईं।
 
Thus, in the ensuing commotion, he received sandalwood paste, betel leaves and garlands of flowers for the second time.
तात्पर्य
गहन (गहन शब्द से लिया गया, जो संस्कृत क्रिया गाह—"तीव्र") शब्द का अर्थ है "भीड़", "लोगों से भरा", "बड़ी सभा"। गोल ( ?) शब्द गहन से लिया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)