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श्लोक 1.15.83  |
চতুর্-দিকে বসিলেন ব্রাহ্মণ-মণ্ডলী
সবেই হৈলা চিত্তে মহা-কুতূহলী |
चतुर्-दिके वसिलेन ब्राह्मण-मण्डली
सबेइ हैला चित्ते महा-कुतूहली |
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| अनुवाद |
| ब्राह्मण भगवान के चारों ओर समूह बनाकर बैठ गए और इस प्रकार सभी लोग हृदय से अत्यन्त प्रसन्न हो गए। |
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| The brahmanas sat around the Lord in groups and thus everyone became very happy from the heart. |
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