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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 50
श्लोक
1.15.50
রাজ-পণ্ডিতের ইচ্ছা সর্ব-গোষ্ঠী-সনে
প্রভুরে করিতে কন্যা-দান নিজ-মনে
राज-पण्डितेर इच्छा सर्व-गोष्ठी-सने
प्रभुरे करिते कन्या-दान निज-मने
अनुवाद
सनातन मिश्र और उनके रिश्तेदारों की भी इच्छा थी कि उनका विवाह भगवान से हो।
Sanatan Mishra and his relatives also wanted her to marry God.
तात्पर्य
सर्व-गोष्ठी-सने वाक्यांश का अर्थ है "अपने सभी पैतृक और मात्रृ पक्ष के रिश्तेदरों के साथ।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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