श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.15.37 
অতএব প্রভু-স্থানে বর্ষেক পডিযা
পণ্ডিত হযেন সবে সিদ্ধান্ত জানিযা
अतएव प्रभु-स्थाने वर्षेक पडिया
पण्डित हयेन सबे सिद्धान्त जानिया
 
 
अनुवाद
इसलिए जो कोई एक वर्ष तक भगवान के अधीन अध्ययन करेगा, वह शास्त्रों के निष्कर्षों को समझने वाला विद्वान बन जाएगा।
 
Therefore, whoever studies under the Lord for one year will become a scholar who understands the conclusions of the scriptures.
तात्पर्य
केवल महाप्रभु गौरासुंदर ही सत-सिद्धांत या परम निष्कर्षों के शिक्षकों में श्रेष्ठ हैं। उन्होंने भगवान की भक्ति सेवा के आधार के संबंध में सभी उचित निष्कर्षों का समर्थन किया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इन सर्वोच्च निष्कर्षों को सभी के लिए सुलभ बना दिया है, जिसमें पापी भी शामिल हैं। उचित निष्कर्षों के उनके त्रिविध परिचय के अनुसार, श्री सनातन गोस्वामी भक्ति-सिद्धांतचार्य बन गए हैं, जो भक्ति सेवा के निष्कर्षों पर आचार्य हैं, श्री रूप गोस्वामी अभिधेयाचार्य बन गए हैं, जो जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए आचार्य हैं, और श्री जीव गोस्वामी का उन निष्कर्षों का समर्थन सभी गौड़ीय वैष्णवों के लिए पूजनीय बन गया है। भजन की गोपनीय प्रक्रिया सभी उचित निष्कर्षों पर आधारित है जिसका पालन श्री रूप के कट्टर अनुयायी श्री दास गोस्वामी ने किया था, जो भक्तों की वृंदावन भक्ति की मूल लता है। जिन्हें भगवान से उचित निष्कर्ष सुनने का अवसर एक वर्ष के लिए भी मिला, वे भौतिक ज्ञान से अहोक्षज की सेवा से कभी विचलित नहीं हो सके।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)