श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.15.33 
চতুর্-দিকে শোভে শিষ্য-গণের মণ্ডলী
মধ্যে পডাযেন প্রভু মহা-কুতূহলী
चतुर्-दिके शोभे शिष्य-गणेर मण्डली
मध्ये पडायेन प्रभु महा-कुतूहली
 
 
अनुवाद
भगवान अपने शिष्यों के विभिन्न समूहों के बीच बैठकर प्रसन्नतापूर्वक शिक्षा देते थे।
 
The Lord would happily sit among various groups of His disciples and teach.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)