श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.15.3 
হেন-মতে মহাপ্রভু বিদ্যার আবেশে
আছে গূঢ-রূপে, কা’রে না করে প্রকাশে
हेन-मते महाप्रभु विद्यार आवेशे
आछे गूढ-रूपे, का’रे ना करे प्रकाशे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान् अपनी शैक्षिक लीलाओं में लीन रहते थे, और स्वयं को किसी को भी प्रकट किए बिना गुप्त रहते थे।
 
Thus the Lord remained absorbed in His educational pastimes, remaining hidden without revealing Himself to anyone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)