श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 218
 
 
श्लोक  1.15.218 
তবে যত নট, ভাট, ভিক্ষুক-গণেরে
তুষিলেন বস্ত্র-ধন-বচনে সবারে
तबे यत नट, भाट, भिक्षुक-गणेरे
तुषिलेन वस्त्र-धन-वचने सबारे
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान ने सभी को - नर्तकों, आशीर्वाद देने वालों और भिखारियों को - वस्त्र, धन और मधुर वचनों से संतुष्ट किया।
 
Thereafter the Lord satisfied everyone – the dancers, the benefactors and the beggars – with clothes, money and sweet words.
तात्पर्य
एक आदर्श गृहस्थ और लोगों के शिक्षक के रूप में भगवान किस प्रकार उचित उम्मीदवारों का सम्मान करते हैं और उन्हें उपहार देते हैं, इस पर ध्यान देना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)