श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 215
 
 
श्लोक  1.15.215 
কি আনন্দ হৈল, সে অকথ্য-কথন
সে মহিমা কোন্ জনে করিবে বর্ণন?
कि आनन्द हैल, से अकथ्य-कथन
से महिमा कोन् जने करिबे वर्णन?
 
 
अनुवाद
वहाँ जो आनन्द अनुभव हुआ, वह शब्दों से परे है, अतः उसकी महिमा का वर्णन कौन कर सकता है?
 
The joy experienced there is beyond words, so who can describe its glory?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)