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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 182
श्लोक
1.15.182
ঈষত্ হাসিলা প্রভু সুন্দর শ্রী-মুখে
দেখি’ সর্ব-লোক ভাসে পরানন্দ-সুখে
ईषत् हासिला प्रभु सुन्दर श्री-मुखे
देखि’ सर्व-लोक भासे परानन्द-सुखे
अनुवाद
भगवान ने भी मधुर मुस्कान के साथ उत्तर दिया। इस प्रकार वहाँ उपस्थित सभी लोग आनंद के सागर में तैरने लगे।
The Lord responded with a sweet smile. Thus, all those present began to swim in an ocean of bliss.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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