श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  1.15.181 
ক্ষণে জিনে’ প্রভু-গণে, ক্ষণে লক্ষ্মী-গণে
হাসি’ হাসি’ প্রভুরে বোলয সর্ব-জনে
क्षणे जिने’ प्रभु-गणे, क्षणे लक्ष्मी-गणे
हासि’ हासि’ प्रभुरे बोलय सर्व-जने
 
 
अनुवाद
एक क्षण भगवान के पार्षद जीतते, तो दूसरे ही क्षण विष्णुप्रिया के पार्षद जीत जाते। लोग मुस्कुराते हुए भगवान को [जिनकी आँखों पर अभी भी पट्टी बंधी हुई थी] परिणाम बताते।
 
One moment the Lord's followers would win, and the next, Vishnupriya's followers would win. People would smile and tell the Lord (who was still blindfolded) the results.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)