श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  1.15.179 
ব্রহ্মাদি দেবতা সব অলক্ষিত-রূপে
পুষ্প-বৃষ্টি লাগিলেন করিতে কৌতুকে
ब्रह्मादि देवता सब अलक्षित-रूपे
पुष्प-वृष्टि लागिलेन करिते कौतुके
 
 
अनुवाद
आम लोगों की नजरों से ओझल होकर ब्रह्मा आदि देवताओं ने प्रसन्नतापूर्वक दम्पति पर पुष्प वर्षा की।
 
Hidden from the sight of common people, gods like Brahma happily showered flowers on the couple.
तात्पर्य
गौरा-नारायण और श्रीमती विष्णुप्रिया देवी जो महा-लक्ष्मी से भिन्न नहीं हैं, के हारों के आदान-प्रदान से सेवा प्रदान करने और प्राप्त करने के उनके अलौकिक आनंदमय कालक्रम को देखते हुए, भगवान विष्णु के भक्त, ब्रह्मा और देवताओं ने मनुष्यों की नज़रों से दूर रहते हुए हर्षपूर्वक फूलों की वर्षा की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)