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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 176
श्लोक
1.15.176
আগে লক্ষ্মী জগন্-মাতা প্রভুর চরণে
মালা দিযা করিলেন আত্ম-সমর্পণে
आगे लक्ष्मी जगन्-माता प्रभुर चरणे
माला दिया करिलेन आत्म-समर्पणे
अनुवाद
तब विश्वमाता विष्णुप्रिया ने भगवान को पुष्पमाला अर्पित की और स्वयं को उनके चरणकमलों में समर्पित कर दिया।
Then Vishwamata Vishnupriya offered a garland of flowers to the Lord and surrendered herself at his lotus feet.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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