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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 171
श्लोक
1.15.171
তবে হর্ষে প্রভুর সকল আপ্ত-গণে
প্রভুরেহ তুলিলেন ধরিযা আসনে
तबे हर्षे प्रभुर सकल आप्त-गणे
प्रभुरेह तुलिलेन धरिया आसने
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान के सगे-संबंधियों ने प्रसन्नतापूर्वक उनका आसन ऊपर उठाया।
Thereafter, the Lord's relatives happily raised his seat.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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