श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  1.15.157 
সবে যা’র রূপবতী কন্যা আছে ঘরে
সেই-সব বিপ্র সবে বিমরিষ করে
सबे या’र रूपवती कन्या आछे घरे
सेइ-सब विप्र सबे विमरिष करे
 
 
अनुवाद
जिन ब्राह्मणों के घर सुन्दर पुत्रियाँ थीं, वे केवल विलाप करने लगे।
 
Those Brahmins who had beautiful daughters in their homes started lamenting only.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)