श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  1.15.140 
তবে প্রভু জননীরে প্রদক্ষিণ করি’
বিপ্র-গণে নমস্করি’ বহু মান্য করি’
तबे प्रभु जननीरे प्रदक्षिण करि’
विप्र-गणे नमस्करि’ बहु मान्य करि’
 
 
अनुवाद
भगवान गौरांग ने अपनी माता की परिक्रमा की और ब्राह्मणों को प्रणाम किया।
 
Lord Gauranga circumambulated his mother and bowed to the brahmanas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)