श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  1.15.128 
অর্ধ-চন্দ্রাকৃতি করি’ ললাটে চন্দন
তথি-মধ্যে গন্ধের তিলক সুশোভন
अर्ध-चन्द्राकृति करि’ ललाटे चन्दन
तथि-मध्ये गन्धेर तिलक सुशोभन
 
 
अनुवाद
उनके माथे पर अर्धचंद्र के आकार का चंदन का लेप लगा हुआ था और उस पर अगुरु से एक आकर्षक तिलक बनाया गया था।
 
His forehead was smeared with a crescent-shaped sandalwood paste and an attractive tilak was made on it with aguru.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)