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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह
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श्लोक 111
श्लोक
1.15.111
বাদ্য-নৃত্য-গীতে হৈল মহা-কোলাহল
চতুর্-দিকে জয-জয উঠিল মঙ্গল
वाद्य-नृत्य-गीते हैल महा-कोलाहल
चतुर्-दिके जय-जय उठिल मङ्गल
अनुवाद
संगीत वाद्यों, नृत्य और गायन से कोलाहल मच गया और चारों ओर विजयोल्लास की मधुर ध्वनियाँ गूंजने लगीं।
There was a commotion of musical instruments, dancing and singing and sweet sounds of victory started echoing all around.
तात्पर्य
मंगल शब्द का अर्थ है "शुभ ध्वनि"।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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