श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  1.14.91 
সকল-ভুবনে, দেখ, যাঙ্’র যশ গায
বিপথ ছাডিযা ভজ হেন প্রভুর পা’য”
सकल-भुवने, देख, याङ्’र यश गाय
विपथ छाडिया भज हेन प्रभुर पा’य”
 
 
अनुवाद
“सभी बुरे मार्गों को त्यागकर, ऐसे भगवान के चरणों की पूजा करो जिनकी महिमा पूरे विश्व में गाई जाती है।”
 
“Abandoning all evil ways, worship the feet of the Lord whose glory is sung throughout the world.”
तात्पर्य
इस संदर्भ में श्री चैतन्य-चंद्रामृत (90 और 85) से निम्नलिखित दो श्लोकों पर चर्चा की जानी चाहिए: “हे भद्रजनों, तुम्हें अपनी मानसिक रूप से निर्मित ईमानदारी और गौर-कृष्ण की भक्ति सेवा के प्रतिकूल धार्मिक सिद्धांतों को त्याग देना चाहिए और श्री चैतन्य के चरण कमलों से जुड़ना चाहिए। काम्य कर्मों में अपनी सभी व्यर्थ तल्लीनता छोड़ दो! आत्म-पूजा से संबंधित एक भी शब्द अपने कानों में न आने दें! अपने अस्थायी भौतिक शरीर, घर, देश और संबंधियों द्वारा भ्रमित न हों। तभी तुम सभी मानवीय लक्ष्यों के शिखर-रत्न को प्राप्त करोगे।”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)