श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.14.88 
শ্রী-চৈতন্য-চন্দ্র বিনে অন্যেরে ঈশ্বর
যে অধম বলে’ সেই ছার শোচ্যতর
श्री-चैतन्य-चन्द्र विने अन्येरे ईश्वर
ये अधम बले’ सेइ छार शोच्यतर
 
 
अनुवाद
जो कोई भी श्री चैतन्य महाप्रभु के अलावा किसी अन्य को परम भगवान मानता है, वह पतित, तुच्छ है और नरक में रहने के योग्य है।
 
Anyone who considers anyone other than Sri Chaitanya Mahaprabhu as the Supreme Lord is fallen, worthless and deserves to live in hell.
तात्पर्य
वर्तमान समय में मायावाद संप्रदाय के कुछ लोगो ने माया में लिपटे एवं इंद्रियों के अधीन एक तुच्छ मनुष्य को कृष्णावतार, रामावतार, गौरावतार, गोपाला अवतार, कल्कि अवतार और साथ ही नित्य गौर अवतार के संयुक्त रूप, जगद्गुरु, विश्वगुरु, युगा अवतार और महा महाप्रभु कहकर उसका प्रचार किया है अतः उन सभी ने इस प्रकार अपराधो का स्वागत किया है और इस प्रकार अतार्किक कथित अवतारो के अनुयायी, जो ज्ञान के अवरोही क्रम या भगवान विष्णु के अवतार के विरोधी हैं न तो अगले जन्म में परमप्रभु की स्थिती प्राप्त कर पाएंगे अपितु सियार के रूप में जन्म लेंगे (" जो भौतिक ज्ञान की उपासना करते हैं वे अपने अगले जन्म में सियार के रूप में पैदा होते हैं।") महाभारत (शांति पर्व, मोक्ष धर्म, 180.48-50) का भी उल्लेख करना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)