রাঢে আর এক মহা ব্রহ্ম-দৈত্য আছে
অন্তরে রাক্ষস, বিপ্র-কাচ মাত্র কাচে
राढे आर एक महा ब्रह्म-दैत्य आछे
अन्तरे राक्षस, विप्र-काच मात्र काचे
अनुवाद
राधा-देश में एक शक्तिशाली ब्रह्म-दैत्य है। हालाँकि वह बाहरी रूप से ब्राह्मण जैसा वेश धारण करता है, परन्तु आंतरिक रूप से वह एक राक्षस है।
In Radha-land there is a powerful Brahma-demon. Although he outwardly wears the guise of a Brahmin, inwardly he is a demon.
तात्पर्य
गंगा के पश्चिमी तट के क्षेत्र राष्ट्र-देश अथवा राढ़-देश के नाम से जाने जाते हैं। राढ़-देश में कई गाँव हैं, पर अभी उन गाँवों के नामों का उल्लेख नहीं किया जा रहा है। ब्राह्मण की मृत्यु के बाद यदि वह प्रेत बने, तो उसे ब्रह्म-डैत्य कहते हैं। जो ब्राह्मण अपने विधान कर्मो का पालन करते हैं, वे सामान्यतः ऊँचे लोक को प्राप्त होते हैं, परन्तु जो अपने कर्मो को त्याग कर पाप कर्म करते हैं और इस प्रकार उनका थोड़ा समय बाद ही मृत्यु हो जाती है, वे ब्रह्म-डैत्य बनते हैं। तथाकथित ब्राह्मण जो वैष्णवो के प्रति ईर्ष्यालु अपमानजनक निन्दक होते हैं, जो श्वास लेने के बाद भी निर्जीव होते हैं और पाप जीवन में पड़े रहते हैं, उन्हें ब्रह्म-डैत्य कहा जाता है। वास्तविक पवित्र ब्राह्मण वैष्णव सिद्धान्तों के प्रति पूरी तरह से पक्षपाती और अधीन होते हैं। चूँकि वैष्णवो के प्रति ईर्ष्यालु तथाकथित ब्राह्मण वास्तव में इसी जीवन में ही प्रेत बनते हैं, इसलिये उन्हें वर्तमान में ही ब्रह्म-डैत्य कहकर सम्बोधित किया जा रहा है। राढ़-देश से ऐसा ही एक ब्रह्म-डैत्य है जिसने बाह्य रूप से ब्राह्मण जैसा व्यवहार किया परन्तु आन्तरिक रूप से वैष्णवो के प्रति ईर्ष्या का पालन किया, और परिणामस्वरूप वह एक ईर्ष्यालु राक्षस बन गया। जब एक ब्राह्मण वैष्णवो से ईर्ष्या करने जैसी राक्षसी गतिविधियों में संलग्न होता है तो उसे ब्रह्म-राक्षस कहा जाता है। हालाँकि राक्षस गायों, देवताओं और वैष्णवो से ईर्ष्या करने में निपुण होते हैं, किन्तु सेमिनल ब्राह्मण परिवारों में जन्म लेने के कारण उनके अहम के गुब्बारे फूले होते हैं। ब्राह्मण कर्मों का प्रदर्शन और बाहरी ब्राह्मण वस्त्रों का धारण ऐसे व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जिनकी आंतरिक रूप से राक्षसी प्रवृतियाँ होती हैं, वह बस एक प्रकार का बनावटी द्वैत होता है जो लोगों को बर्बाद कर देता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥