श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.14.79 
সাক্ষাতে ও শিষ্য কর’ আমা’ সবাকারে
থাকুক তোমার কীর্তি সকল-সṁসারে”
साक्षाते ओ शिष्य कर’ आमा’ सबाकारे
थाकुक तोमार कीर्ति सकल-सꣳसारे”
 
 
अनुवाद
“अब कृपया हमें अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करें, और सम्पूर्ण विश्व को आपकी महिमा का गान करने दें।”
 
“Now please accept us as your disciples, and let the whole world sing your glory.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)