श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 72-73
 
 
श्लोक  1.14.72-73 
অর্থ-বৃত্তি লৈ’ সর্ব-গোষ্ঠীর সহিতে
যা’র স্থানে নবদ্বীপে যাইব পডিতে
হেন নিধি অনাযাসে আপনে ঈশ্বরে
আনিযা দিলেন আমা’ সবার দুযারে
अर्थ-वृत्ति लै’ सर्व-गोष्ठीर सहिते
या’र स्थाने नवद्वीपे याइब पडिते
हेन निधि अनायासे आपने ईश्वरे
आनिया दिलेन आमा’ सबार दुयारे
 
 
अनुवाद
“वह दुर्लभ कसौटी, जिसके पास हम मित्रों और धन के साथ नवद्वीप में अध्ययन करने जाते थे, अब ईश्वर द्वारा हमारे द्वार पर ला दी गई है।
 
“That rare touchstone, which we used to go to study in Navadvipa with friends and money, has now been brought to our doorstep by God.
तात्पर्य
प्रभु के साक्षात उपस्थित होने के समय, पूर्वी बंगाल के अनेक लोग धनार्जन करते थे और अपने पुत्रों तथा आश्रितों को लेकर तत्कालीन शिक्षा केंद्र नवद्वीप में पढ़ने जाते थे। निमाई पंडित तो उस समय पंडित समाज के रत्न के रूप में प्रसिद्ध थे। विद्यार्थी केवल उन्हीं के पास ही अध्ययन करना चाहते थे, पर किसी न किसी कारण से सब लोग नवद्वीप जाकर उनके पास पढ़ने में समर्थ नहीं हो पाते थे। आज विद्यार्थियों के सौभाग्य से वही रत्न पंडित निमाई पंडित स्वयं पद्मावती के समीप पधारे थे, अतः वे सभी अपने भाग्य को सराहते हुए कहते थे कि अब उनको नवद्वीप जाने की आवश्यकता नहीं रह गई।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)