श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.14.56 
এই-মত পথে দেখে যত স্ত্রী-পুরুষে
পুনঃ পুনঃ সবে ব্যাখ্যা করেন সন্তোষে
एइ-मत पथे देखे यत स्त्री-पुरुषे
पुनः पुनः सबे व्याख्या करेन सन्तोषे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सभी स्त्रियों और पुरुषों ने, जिन्होंने प्रभु को गुजरते हुए देखा, पूर्ण संतुष्टि के साथ बार-बार उनकी स्तुति की।
 
Thus all the women and men who saw the Lord passing by praised Him again and again with complete satisfaction.
तात्पर्य
व्यख्या करेण शब्द इंगित करते हैं कि उन्होंने भगवान के बेमिसाल रूप की प्रार्थना की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)