श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  1.14.55 
যেবা ভাগ্যবতী হেন পাইলেন পতি
স্ত্রী-জন্ম সার্থক করিলেন সেই সতী”
येबा भाग्यवती हेन पाइलेन पति
स्त्री-जन्म सार्थक करिलेन सेइ सती”
 
 
अनुवाद
"वह भाग्यशाली है जिसे ऐसा पति मिला है। उस पतिव्रता स्त्री का जीवन सफल हो गया।"
 
"She is lucky to have such a husband. The life of that devoted wife became successful."
तात्पर्य
पूर्वी बंगाल की विवाहित महिलाओं ने गौरा की पत्नी लक्ष्मीदेवी द्वारा प्राप्त किए गए एक महिला के जन्म स्वीकार करने के सौभाग्य और पूर्णता को महसूस किया, और उन्होंने भगवान की सेवा में उनके साथ विस्मय और श्रद्धा के भाव में भाग लिया। वे अपनी संवैधानिक स्थिति को अपने स्वयं के विस्तार के रूप में नहीं भूलीं और गौरा भोगी बनने के लिए, या गौरा के उपभोक्ताओं की तरह, काल्पनिक गौरा-नागरियों की पूजा के रूप में घृणित सांसारिक दुर्व्यवहार स्थापित करने का प्रयास नहीं किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)