श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.14.53 
যে যে জন দেখে প্রভু চলিযা আসিতে
সেই আর দৃষ্টি নাহি পারে সম্বরিতে
ये ये जन देखे प्रभु चलिया आसिते
सेइ आर दृष्टि नाहि पारे सम्बरिते
 
 
अनुवाद
जिसने भी प्रभु को उनकी यात्रा में देखा, वह उनसे अपनी आँखें नहीं हटा सका।
 
Whoever saw the Lord on his journey could not take their eyes off him.
तात्पर्य
प्रभु की सर्वाधिक आकर्षक रूप की झलक देखने वाले उनके यात्रा के मद्देनज़र कहीं और देखना पसंद नहीं करते थे। प्रभु की अद्वितीय सुंदरता और गुणवत्ता ने सभी दर्शकों को चकित कर दिया था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)