श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.14.5 
হেন-মতে বৈকুণ্ঠ-নাযক সর্ব-ক্ষণ
বিদ্যা-রসে বিহরেণ লৈ’ শিষ্য-গণ
हेन-मते वैकुण्ठ-नायक सर्व-क्षण
विद्या-रसे विहरेण लै’ शिष्य-गण
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वैकुण्ठ के भगवान अपने शिष्यों के साथ निरन्तर अपनी शैक्षिक लीलाओं का आनन्द लेते रहे।
 
Thus the Lord of Vaikuntha continued to enjoy His educational pastimes with His disciples.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)