शक्ति-संगम-तंत्र पुस्तक में बांगा-देश की सीमा का वर्णन इस प्रकार किया गया है : “बंगाल की खाड़ी से लेकर ब्रह्मपुत्र नदी तक का सम्पूर्ण भूखंड बांगा-देश कहलाता है। हे पार्वती, यह भूमि व्यक्ति को सभी पूर्णता प्रदान करती है।”
प्राचीन पाल वंश के शासनकाल के बाद और राजधानी को नवद्वीप और विक्रमपुर में स्थानांतरित करने के बाद भी, उत्तरी बंगाल को अभी भी वरेन्द्र के रूप में जाना जाता था, उत्तर बंगाल के उत्तर-पश्चिम के प्रांतों को कर्ण-सुवर्ण के रूप में जाना जाता था, पश्चिम बंगाल को गौड़ा और राढ़ के रूप में जाना जाता था, वर्तमान पूर्वी बंगाल को बांगा-देश के रूप में जाना जाता था और दक्षिण बंगाल को समताट और ताम्रलिप्त के रूप में जाना जाता था। संस्कृत साहित्य में भी बंगाल के पूर्व और मध्य क्षेत्रों को बांगा-देश के रूप में संदर्भित किया गया था। दिल्ली के मुगल सम्राट अकबर के प्रधान मंत्री अबुल फजल ने अपनी इतिहास पुस्तक, आइन-ए-अकबरी या "द रूल ऑफ़ अकबर" में लिखा है कि बांगा के पूर्व हिंदू राजाओं ने अपने राज्यों को आला या मिट्टी के टीले से घेर लिया था, और इसलिए यह क्षेत्र बांग्ला के नाम से जाना जाने लगा।
