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श्लोक 1.14.47  |
কোন-দিন মহা-পদ্ম-গন্ধ শচী আই
ঘরে-দ্বারে সর্বত্র পাযেন, অন্ত নাই |
कोन-दिन महा-पद्म-गन्ध शची आइ
घरे-द्वारे सर्वत्र पायेन, अन्त नाइ |
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| अनुवाद |
| एक दिन माता शची को पूरे घर में कमल के फूलों की सुगंध महसूस हुई। |
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| One day Mother Shachi felt the fragrance of lotus flowers throughout the house. |
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