श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.14.34 
কেহ বলে,—“দুঃখিতে তারিতে অবতার
সর্ব-মতে দুঃখিতেরে করেন নিস্তার
केह बले,—“दुःखिते तारिते अवतार
सर्व-मते दुःखितेरे करेन निस्तार
 
 
अनुवाद
किसी और ने कहा, "भगवान ने संकटग्रस्त लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए अवतार लिया है, और इसलिए वे उनके उद्धार के लिए विभिन्न साधनों का उपयोग करते हैं।
 
Someone else said, “The Lord has incarnated to deliver those in distress, and so He uses various means to bring about their salvation.
तात्पर्य
कुछ लोगों का कहना है कि क्योंकि ब्रह्मा के नेतृत्व में देवता और नारद के नेतृत्व में ऋषि लोग रहस्यमय सिद्धियों के स्वामी थे, इसलिए उन्होंने ही अतिथियों का रूप और वेश धारण किया और भगवान गौरा-नारायण के घर से चावल प्रसाद प्राप्त करके भाग्यवान बने। क्योंकि उनके सिवाय कोई भी सामान्य प्राणी मृत्यु लोक उन प्रभु की प्रत्यक्ष कृपा पाने के लिए पात्र नहीं है, जिससे कि अतिथि के तौर पर उनके घर में रह सके। फिर भी कुछ और लोग कहते हैं कि लक्ष्मी-नारायण इस युग में लक्ष्मी-गौरा के रूप में प्रकट हुए हैं ताकि सभी दुखी लोगों को उनके दयनीय स्थिति से मुक्त किया जा सके। क्योंकि वे सर्वाधिक दयालु हैं, इसलिए उन्होंने बिना किसी विचार किए कि कोई योग्य है या नहीं, सबको खाना और आश्रय प्रदान करके अपनी दया का वितरण किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)