श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.14.3 
জয জয সর্ব-বৈষ্ণবের ধন-প্রাণ
কৃপা-দৃষ্ট্যে কর’, প্রভু, সর্ব-জীবে ত্রাণ
जय जय सर्व-वैष्णवेर धन-प्राण
कृपा-दृष्ट्ये कर’, प्रभु, सर्व-जीवे त्राण
 
 
अनुवाद
जो समस्त वैष्णवों के प्राण और आत्मा हैं, उनकी जय हो। हे प्रभु, कृपया अपनी कृपा दृष्टि से पतित आत्माओं का उद्धार करें।
 
Victory to the One who is the life and soul of all Vaishnavas. O Lord, please save the fallen souls with Your gracious glance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)