श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.14.21 
গৃহস্থেরে মহাপ্রভু শিখাযেন ধর্ম
“অতিথির সেব—গৃহস্থের মূল-কর্ম
गृहस्थेरे महाप्रभु शिखायेन धर्म
“अतिथिर सेव—गृहस्थेर मूल-कर्म
 
 
अनुवाद
महाप्रभु ने गृहस्थों को शिक्षा दी, “गृहस्थ का सबसे बड़ा कर्तव्य अपने अतिथियों की सेवा करना है।
 
Mahaprabhu taught the householders, “The greatest duty of a householder is to serve his guests.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)