श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.14.20 
এই-মত যতেক অতিথি আসি’ হয
সবারেই জিজ্ঞাসা করেন কৃপাময
एइ-मत यतेक अतिथि आसि’ हय
सबारेइ जिज्ञासा करेन कृपामय
 
 
अनुवाद
इस प्रकार दयालु भगवान ने अपने प्रत्येक अतिथि की आवश्यकताओं के बारे में पूछताछ की।
 
Thus the merciful Lord inquired about the needs of each of his guests.
तात्पर्य
जिज्ञासा करेना शब्दों से यह पता चलता है कि प्रभु ने अपने अतिथियों से पूछा कि उन्हें पानी या खाने की जरूरत है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)