श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  1.14.190 
হেন মতে বৈকুণ্ঠ-নাযক গৌরহরি
কৌতুকে আছেন বিদ্যা-রসে ক্রীডা করি’
हेन मते वैकुण्ठ-नायक गौरहरि
कौतुके आछेन विद्या-रसे क्रीडा करि’
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वैकुण्ठ के स्वामी श्री गौरहरि ने नवद्वीप में आनन्दपूर्वक विद्यामय लीला का आनन्द लिया।
 
In this way, Lord Shri Gaurhari of Vaikuntha happily enjoyed the play of knowledge in Navadvipa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)