| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव » श्लोक 183 |
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| | | | श्लोक 1.14.183  | প্রভু বলে,—“মাতা, দুঃখ ভাব’ কি-কারণে?
ভবিতব্য যে আছে, সে খণ্ডিবে কেমনে? | प्रभु बले,—“माता, दुःख भाव’ कि-कारणे?
भवितव्य ये आछे, से खण्डिबे केमने? | | | | | | अनुवाद | | प्रभु बोले, "हे माता, तुम इतनी उदास क्यों हो? जो होना तय है, उसे कौन रोक सकता है?" | | | | The Lord said, "O Mother, why are you so sad? Who can stop what is destined to happen?" | | ✨ ai-generated | | |
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