श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 182
 
 
श्लोक  1.14.182 
কস্য কে পতি-পুত্রাদ্যা মোহ এব হি কারণম্
कस्य के पति-पुत्राद्या मोह एव हि कारणम्
 
 
अनुवाद
"इस भौतिक जगत में कौन किसका पति, पुत्र या मित्र है? वास्तव में कोई किसी का रिश्तेदार नहीं है। इस भ्रांति का कारण केवल अज्ञान ही है।"
 
"Who is whose husband, son, or friend in this material world? In reality, no one is anyone's relative. The cause of this misconception is simply ignorance."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)