श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 180
 
 
श्लोक  1.14.180 
প্রিযার বিরহ-দুঃখ করিযা স্বীকার
তূষ্ণী হৈ’ রহিলেন সর্ব-বেদ-সার
प्रियार विरह-दुःख करिया स्वीकार
तूष्णी है’ रहिलेन सर्व-वेद-सार
 
 
अनुवाद
भगवान, जो वेदों के साक्षात स्वरूप हैं, ने अपनी पत्नी से वियोग का दुःख स्वीकार कर लिया और मौन रहे।
 
The Lord, who is the embodiment of the Vedas, accepted the pain of separation from his wife and remained silent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)