श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 14: भगवान की पूर्व बंगाल की यात्रा और लक्ष्मीप्रिया का तिरोभाव  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  1.14.179 
পত্নীর বিজয শুনি’ গৌরাঙ্গ শ্রী-হরি
ক্ষণেক রহিলা প্রভু হেঙ্ট মাথা করি’
पत्नीर विजय शुनि’ गौराङ्ग श्री-हरि
क्षणेक रहिला प्रभु हेङ्ट माथा करि’
 
 
अनुवाद
जब भगवान गौरांग ने अपनी पत्नी के अदृश्य होने के बारे में सुना, तो उन्होंने अपना सिर नीचे झुका लिया और कुछ देर तक चुप रहे।
 
When Lord Gauranga heard about his wife's disappearance, he bowed his head and remained silent for some time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)